आखिर क्यों बढ़ रही है कैंसर मरीजों की संख्या, कैसे होता है ये रोग | Why Cancer is Spreading Fast

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आखिर क्यों बढ़ रही है कैंसर मरीजों की संख्या, कैसे होता है ये रोग | Why Cancer is Spreading Fast
सामान्य कैंसर समेत ओरल, सर्वाइकल और ब्रेस्ट कैंसर के मामलों में तेजी से वृद्धि हुई है।
 नेशनल हेल्थ प्रोफाइल, 2019 द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक एनसीडी क्लिनिक्स ने 2017 से लेकर 2018 के बीच कैंसर के मामलों की पहचान की है। ये रिपोर्ट बताती है कि इस एक साल के अंतराल में कैंसर के मामले 324% यानी तीन गुना से भी ज्यादा बढ़ गए हैं।

कैंसर का तात्पर्य शरीर में अनियंत्रित रूप से वृद्धि करने वाली कोशिकाओं से हैं। यह अनावश्यक रूप से वृद्धि कर ऊतक को प्रभावित करती है तथा शरीर के बचे हुए भाग को इसके संपर्क में ले लेती है। कैंसर एक ऐसा रोग है जो किसी भी उम्र में हो सकता है।

  1. वर्तमान समय में कैंसर एक भयानक बीमारी के रूप में उभरकर सामने आया है। इसकी चपेट में हर वर्ष सबसे अधिक लोग आते हैं और समय पर इलाज नहीं हो पाने के कारण सर्वाधिक लोग असमय ही काल-कवलित हो जाते हैं। ये सही है कैंसर का इलाज मुश्किल पर नामुमकिन नहीं।
  2.  कैंसर को लेकर लोगों में अनभिज्ञता और उदासीनता को कम करने तथा इस रोग के प्रति उन्हें जागरूक बनाने, शिक्षित करने, इससे संबंधित मिथकों को मिटाने के लिए प्रतिवर्ष विश्वभर में 4 फरवरी को ‘विश्व कैंसर दिवस’ मनाया जाता है। 
  3. एक अनुमान के मुताबिक भारत में 42 प्रतिशत पुरुष और 18 प्रतिशत महिलाएं तंबाकू के सेवन के कारण कैंसर का शिकार होकर अपनी जान गंवा चुके हैं। राष्ट्रीय कैंसर संस्थान के एक प्रतिवेदन के अनुसार देश मे हर साल इस बीमारी से 70 हजार लोगों की मृत्यु हो जाती है, इनमें से 80 प्रतिशत लोगों के मौत का कारण बीमारी के प्रति उदासीन रवैया है। 
  4. उन्हें इलाज के लिए डॉक्टर के पास तब ले जाते हैं जब स्थिति लगभग नियंत्रण से बेकाबू हो जाती है। कैंसर संस्थान की इस रिपोर्ट के अनुसार भारत में हर साल सामने आ रहे साढ़े बारह लाख नए रोगियों में से लगभग सात लाख महिलाएं होती है।
  5.  लगभग इनमें से आधी साढ़े तीन लाख महिलाओं की मौत हो जाती है। इनमें से भी 90 प्रतिशत की मृत्यु का कारण रोग के प्रति बरते जाने वाली अगंभीरता है। ये महिलाएं डॉक्टर के पास तभी जाती हैं जब बीमारी अनियंत्रण की स्थिति में पहुंच जाती है।
  6.  ऐसी स्थिति में यह बीमारी लगभग लाइलाज हो चुकी होती है।निःसंदेह, यदि किसी व्यक्ति को कैंसर से बचाव करना है या कोई देश अपने को कैंसर मुक्त राष्ट्र बनाने का सपना देखता है तो उसे अपने देश में धड़ल्ले से बिक रहे मादक व नशीले पदार्थों व शराब की फैक्ट्रियों पर राजस्व की चिंता कई बगैर रोक लगाने के लिए कदम उठाने होंगे।
  7.  यहां तक कि मोटापे को बढ़ाने का कारण बन रहे जंक फूड पर फैट टैक्स लागू कर इनके सेवन से आमजन को बचाने के लिए प्रयत्न करने होंगे। कैंसर को लेकर जो प्रमुख बात निकलकर सामने आ रही है वो है लोगों की इस रोग के प्रति अगंभीरता। 
  8. इससे पता लगता है कि समाज में एड्स की तरह कैंसर के रोगियों के प्रति भी भेदभाव बरकरार है इसलिए लोग शीघ्रता से इस रोग को उजागार करने में संकोच करते हैं। हमें इस रोग से जुड़े मिथकों व विकृत मानसिकता को मिटाने के लिए जन-जागृति कार्यक्रमों में तेजी लानी होगी।

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